महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा कैसे करें? और प्रसन्न कैसे करें?
महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा कैसे करें? और प्रसन्न कैसे करें?
महाशिवरात्रि के दिन दिन भर पूजा की जाती है। वही प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद रात और दिन के बीच का समय पूजा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय की गई पूजा से भगवान शिव बहुत जल्दी ही खुश हो जाते हैं। वहीं इसके बाद रात भर जागरण करके रात के चारों पहर में पूजा करने से शिव जी बहुत जल्दी खुश हो जाते हैं।
महाशिवरात्रि की पूजा कैसे करें?
व्रत रखने वाले दिन भर शिव मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप करें तथा पूरा दिन निराहार रहे। रोगी अशक्त और विधि। दिन में फलाहार लेकर रात ही पूजा कर सकते हैं। शिव पुराण में रात्रि के चारों पहर में शिव पूजा का विधान है। शाम को स्नान करके किसी शिव मंदिर में जाकर अथवा घर पर ही पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके। त्रिपुंड एवं रुद्राक्ष। करके पूजा का संकल्प इस प्रकार ले।
1.व्रत रखने वाले फल फूल चंदन बिल्वपत्र धतूरा धूप व दीप से रात के चारों पहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए साथ ही भोग भी लगाना चाहिए।
2. दूध, दही, घी शक्कर से अलग-अलग तथा सब को एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान करा करें जल से अभिषेक करें।
3. चारों पहर की पूजा में शिव पंचाक्षर मंत्र यानी ओम नमः शिवाय का जाप करें।
4. भव्य सर्व रूद्र पशुपति उग्र महान भीम और ईशान इन 8 नामों फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती और परिक्रमा करें।
महाशिवरात्रि के दिन दिन भर पूजा की जाती है। वही प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद रात और दिन के बीच का समय पूजा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय की गई पूजा से भगवान शिव बहुत जल्दी ही खुश हो जाते हैं। वहीं इसके बाद रात भर जागरण करके रात के चारों पहर में पूजा करने से शिव जी बहुत जल्दी खुश हो जाते हैं।
महाशिवरात्रि की पूजा कैसे करें?
व्रत रखने वाले दिन भर शिव मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप करें तथा पूरा दिन निराहार रहे। रोगी अशक्त और विधि। दिन में फलाहार लेकर रात ही पूजा कर सकते हैं। शिव पुराण में रात्रि के चारों पहर में शिव पूजा का विधान है। शाम को स्नान करके किसी शिव मंदिर में जाकर अथवा घर पर ही पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके। त्रिपुंड एवं रुद्राक्ष। करके पूजा का संकल्प इस प्रकार ले।
1.व्रत रखने वाले फल फूल चंदन बिल्वपत्र धतूरा धूप व दीप से रात के चारों पहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए साथ ही भोग भी लगाना चाहिए।
2. दूध, दही, घी शक्कर से अलग-अलग तथा सब को एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान करा करें जल से अभिषेक करें।
3. चारों पहर की पूजा में शिव पंचाक्षर मंत्र यानी ओम नमः शिवाय का जाप करें।
4. भव्य सर्व रूद्र पशुपति उग्र महान भीम और ईशान इन 8 नामों फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती और परिक्रमा करें।
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