पुराने जमाने के किस्से कहानियां। वेला कली रानी की कहानी

             !!पुराने जमाने के किस्से कहानियां!!
                   !!वेला कली रानी की कहानी!!

       एक राजा थे उनके चार लड़के थे तीन लड़कों की शादियां उन्होंने कर दी छोटे बाले की शादी उन्होंने नहीं कर रखी थी पहले दिन क्या हुआ की बड़ी वाली भाभी उनकी खाना बनाई तो उन्होंने बोला कि आज रोटी कच्ची है दूसरे दिन उस से छोटी वाली बनाई खाना तो बोले आज रोटी जली हुई है तीसरे दिन उससे छोटी वाली भाभी ने उनकी खाना बनाया तो उन्होंने बोला आज दाल जली हुई है।

        तो तीसरे नंबर वाली भाभी ने बोला कि आप बहुत होशियार हो जानती हूं की बेला कली रानी ब्याह के लाओगे।

        तो उन्होंने उसी समय खाना नहीं खाया और थाली में छोड़कर खड़े हो गए बोले कि अब मैं घर में उसी दिन खाना खाऊंगा जिस दिन इस घर में बेला कली रानी आएगी ।

      वो घर से निकल गए और जाते-जाते एक बन गये दूसरे  वन गये तीसरा बन गये  चौथे बन में जब पहुंचे तो थक गए और एक पेड़ के नीचे बैठ गए।

      और वह क्या देखते हैं कि एक महात्मा जी तपस्या में एक पेड़ के नीचे ध्यान लगाकर बैठे हुए हैं तो वह क्या करते हैं कि वहां की साफ सफाई कर देते हैं और गाय के गोबर से लिप पोत देते हैं और जाकर एक जगह बैठ जाते हैं।

        जब महात्मा जी का ध्यान टूटता है तो वह क्या देखते हैं कि यहां पर साफ-सफाई किसने किया है जब देखने लगते हैं तो एक पेड़ के नीचे एक व्यक्ति बैठा हुआ रहता है तो उसको बुलाते हैं जब वह पास में पहुंचते हैं तो बोलते हैं बेटा तुम ने साफ सफाई की है तो तुमने मेरी बहुत सेवा की बोलो क्या चाहिए तुमको क्या चाहिए तो उन्होंने तीन वचन ले लिया कि मैं जो मांग लूंगा मुझे मिलेगा उसके बाद वह बोले कि मेरे को बेला कली रानी चाहिए महात्मा जी बोले बेटा मैं तो वचन दे दिया तो दूंगा मगर बहुत कठिन हैं ।

      महात्मा जी उनको तोता बना देते हैं  और बोलते हैं जा बेटा यहां से 4 मील के दूर पर एक बेल का पेड़ है और उस वेल में सिर्फ एक ही बेल लगा हुआ है उसको तोड़कर मेरे पास लेकर आना और वह चल दिए जाते जाते वहां पर पहुंचा और उस बॉयल को तोड़ा और तोड़ने के बाद जब उड़कर चलने लगा तो टेटे करने लगा उसके बाद वहां पर जोड़ सैनिक लगे हुए थे और देखें तो उस सूखने का पीछा किए और पकड़ कर ले आए और उसको मार कर फेंक दिए अब एल्को स्पेन में फिर से लगा दिए तो फिर जब 1 माह बीत गया तो महात्मा को चिंता हुई कि वह अभी तक तो आया नहीं जब जाकर वह देखते हैं तो सूखने का युद्ध रखना पड़ा हुआ मरा हुआ पड़ा हुआ था उसके बाद उसको लेकर आते हैं और मंत्र से उसको फिर जिंदा करते हैं उसके बाद सोचते हैं कि सबसे चालाक पक्षी कौन होता है ? तो उनके मन में आया कौवे से चला पक्षी कोई नहीं होता है और वह फिर उसको कवर बनाए बोले इस बार फिर जा और उस बैल को लेकर आ तो वहां पर जब पहुंचा बेल के पेड़ के पास वह तो तोड़ के दिल लेकर उड़ दिया तो देखें यह दूध निकल गया कि वह देखो चोर दिल तोड़ के निकल रहा है वह कौवा आगे आते हुए महात्मा कुर्सी में चला गया घुस गया और उसके बाद सैनिक पहुंचे भोले यहां पर चौराया है मेरा एक बैल कोई तोड़ के ले गया है तो महात्मा जी बोले कि मैं महात्मा हूं यहां पर चोट मेरे को मतलब क्या और मार के भगा दी वहां से जब वह सैनिक लोग चले गए तो उसको प्रकट करते हैं आपने विद्या से तो फिर जब प्रकट होते हैं तो बोले कि बेटा यहां पर गाय का गोबर ला और पोत लीप  कर अच्छा कर दें वही करते हैं जो महात्मा जी बोले उसके बाद वहां पर धूप अगरबत्ती करते हैं फिर उसके बाद में मंत्र बोलते हैं तो बेला काली रानी प्रकट हो जाती है और बेला काली रानी की चमक देखकर राजा मूर्छित हो जाते हैं तो महात्मा जी उसको डांटते हैं बेला कली को कि तेरा पति है इसको मूर्छा से बाहर निकाल और वो पानी आंख में मारती है तो फिर  से जाग जाते हैं और बोलते हैं कि बेटा मैं इसको बेल के रूप में फिर कर दे रहा हूं और ले तेरी संपत्ति हुई और लेकर तू जा । मगर एक बात का ध्यान रखना कि महल पहुंचने के बााद ही इसको बेल से निकालना।
     
       और वह चल देते हैं जाते-जाते जब आपने राज्य पहुंचते हैं तो एक बावली रहती है वहां पर सोचते हैं कि अब तो आपने राज्य पहुंच ली गए थोड़ा सा आराम कर लेते हैं और वह गाय का गोबर ला कर लीप पोत देते हैं बेला कली रानी को प्रकट कर देते हैं और उन्हीं की गोदी पर सो जाते हैं जब उनकी नींद आ जाती है तो वह रानी को बोलती है कि अब तो आप राज्य पहुंच ही गई हैं अब बाहर आने का मौका आपको नहीं मिलेगा इसलिए अभी राजा साहब सो रहे हैं तो चलिए हम आपको घुमा कर लाते हैं और रानी साहब तैयार हो जाती हैं लेकर वह बावली तरफ जाती है बेला कली रानी को तो बेला कली रानी अपना पूरा सिंगार पहनकर जब उस बाउली की छांव में देखती हैं और वह  बसुहारिन भी तो बेला कली रानी अच्छी लगती है तो बसुहारिन बोलती है कि आप बहुत अच्छी लगती हो एक बार आप अपना गहना मुझे दे दो मैं पहनकर देखती हूं कि मैं कैसी लगती हूं और आप मेरा पहनकर तो बेला कली रानी बोलती है ठीक है जब वह पहनकर झांकने लगी तो रानी को उसी में धक्का दे दे ती है और बसुहारिनआती है तो अपना सामान बाहर फेंक कर और उनका सिर अपनी गोदी पर रख कर बैठ जाती है।

         इसके बाद जब राजा की नींद खुलती है तो वह अपने राज्य में इत्तला करवाते हैं कि मैं बेला कली रानी को ब्याह कर लाया हूं उसका स्वागत करने की तैयारी किया जाए जिसके बाद जो उनकी भाभिया होती हैं तो रस्ते के इधर और उधर भी एक तरफ तेल का टैंकर तो एक तरफ भी घी का  मटका रखवा देती हैं और बोलती हैं कि आपका आने के लिए स्वागत का प्रबंध हो चुका है इसके बाद जब वह उस बसुहारिन  लेकर राजा अपने महल की तरफ चलते हैं तो वो अपना हाथ पाव शकेल कर चलती  है सोचती हैं कहीं मेरी साड़ी और गहने गंदे ना हो जाए तो रानियां समझ जाती हैं कि यह  बेला कली रानी नहीं और कोई हैं । राजा और बसुहारिन का परछन होता है वे रहने लगते हैं ।

        राजा एक दिन अहेर खेलने जाते हैं और अहेर  खेलते खेलते जब प्यास लग आती है तो वह उसी बावली में जाते हैं उन के सब साथी लोग जाते हैं तो वहां पर एक कमल का फूल रहता है तो हाथ बढ़ाते हैं तो और दूर चला जाता है इसके बाद लास्ट में जब राजा पहुंचते हैं तो पानी पीते हैं पानी पीने के बाद वह जब उस फूल को हाथ बढ़ाते हैं तो उनके यहां आ  कर बैठ जाता है और राजा उस फूल को लाकर घर में रख देते हैं।

      उस फूल को रखे हुए 1 माह बीत जाते हैं और बसुहारिन देखती है कि वह फूल वैसा का वैसा ही है तो वह उस दिन शाम को राजा से पूछती है कि यह फूल आप कहां से लेकर आए हैं तो वह बताते हैं कि मैं इस फूल को बावली से लेकर आया हूं तो वह समझ जाती है इसके बाद अगले दिन क्या करती है उस फूल को नोच नाच कर बाहर फेंक देती है। अगले दिन राजा जब फूल को नहीं देखते हैं तो पूछते हैं कि वह फूल कहां गया तो बसुहारिन बोलती है कि वह फूल 1 महीने हो गया था तो मुरझा गया क्या वह फूल हमेशा के लिए था क्या ?उसके बाद क्या होता है कि एक आहिर बकरी चराने के लिए उधर लाता है तो जो बाहर फूल पड़ा हुआ था तो वह बकरी उस फूल को खा लेती है जब वह शाम को लेकर जाता है अपने घर तो वहां पर वह निकाल देती है वहीं पर एक बेल का पेड़ तैयार होता है ऐसे करते करते एक दिन जब वह है अहीर बकरी चराने चला गया तो घर में कोई नहीं था तो वह बेला कली रानी उतर कर ऊपर से घर में खाना बनाकर फिर चली गई जब वह अहिर आता है तो देखता है कि कौन बना कर खाना चला गया तो सोचता है अच्छा खाना मिला खा कर सो जाता है ऐसे करते-करते 10-15 दिन बीत गए तो एक दिन वह नहीं गया और अपने घर में छिप गया तो वहां से वह उतरी और खाना बनाने लगी तो अहिर बोलता है देख कर उसको कि तुम कौन हो तो बोलती है कि मैं तुम्हारी मौसी की लड़की हूं आई हूं गांव से घूमने के लिए तो वह बोला कि ठीक है रहो और तुम जब तक मन हो।

      उधर वह यादव अपनी बकरियां चराने के लिए बाहर चला था अब घर में रहती खाना बनाने लगती एक दिन क्या हुआ कि राजा की हाथिया लेकर चराने उसके घर के पास आए तो वह अपने बाड़े के बाहर भगा दी उसके बाद जब शिकायत लेकर राजा के दरबार में पहुंचे तो उसको अहिर को बुलाया गया तो वह यादव गया और उससे पूछा गया कि वह कौन है लड़की जो रहती है तुम्हारे घर में तो बोला कि मेरी मौसी की लड़की है जब वह राजा उसको देखें तो मोहित हो गए बोले मैं इससे शादी करूंगा।

      उधर जब बसुहार इनको यह सब पता चला तो बस भाई समझ गई कि वह और कोई नहीं बेला कली रानी ही है उधर राजा उसको ब्याह कर घर में लाएं  और रहने लगे।

        एक दिन क्या हुआ कि बसुहारिन रात में सूअर का मांस लाकर उसके बिस्तर पर छिडक दी और इधर  उधर गंदा कर दिया  सुबह जब हुआ तो राजा जब सब देखते हैं तब बेला कली रानी को फांसी की सजा सुना देते हैं।

   
       एक दिन क्या होता है कि राजा अहेर खेलने जाते हैं  तो रात हो जाती हैं वहां पर एक तलाब रहता है तालाब के पास एक मंदिर रहता है मंदिर के पास राजा रुक जाते हैं वहां पर एक चकही एक चकहा रहता है चकही चकहे से बोलती है कि
         कुछ किस्सा सुना रे  तो वह बोलता है कि क्या सुनाऊं दीवारों के भी कान होते हैं जब वह बोलते ही रह गई तो वह बोला कि अच्छा सुनो।
 
           तो वह चकहा बेला काली रानी और राजा का किस्सा सुनाता है तो उधर राजा सारा किस्सा सुनता रहता है तो फिर चकही चकहे से बोलती है कि जो हुआ सो हुआ मगर इसका कुछ उपाय भी है तो चकहा बोलता है कि  सुन रे चकही upay To Hai.

           सुबह 4:00 बजे बेला कली रानी जो यह तलाव है यहा पर  नहाने आती है जब उसकी सारी शक्तियां नहा कर चली जाती हैं तब वह लास्ट में नहा कर जाती है अगर वह राजा उसको लास्ट में पकड़ ले और बोले कि मैं आपको समझ नहीं पाया और अपनी गलती मान ले तो वह बेला कली  रानी मान जाएगी।

           और सुबह वह राजा वैसा ही करता है जैसा चकहा  बोला था  मगर बेला कली रानी एक  बात  रख देती है सामने कि जब उस बसुहारिन को तोप दम करवा दिया जायेगा  तभी मैं महल में जाऊंगी तो राजा बसुहारिन को आधा धर जमीन में दधसवा देते हैं अपना रथ उसी के उपर से  लेकर निकलते हैं

           और आपने घर में इत्तला दे देते हैं कि अब वेला कली रानी ब्याह कर ला रहा हूं इस बार भी उनकी भाभिया  दोनों तरह घी के  मटके रखवा देती हैं तो इस बार बेला कली रानी दोनों तरफ हाथ डालते हुए निकल आती हैं तो उनकी भाभियों जान जाती हैं कि हां इस बार बेला कली रानी आ रही है और घर में आकर दोनों का परछन होता  है हो राजा बनते हैं वो रानी बनती है और दोनों आराम से रहने लगते हैं।

                                 !!सीता राम!!

     

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