श्रीमद भगवत गीता का संदेश
!!श्रीमद्भागवत गीता का संदेश समझि ये !!
गीता वह आध्यात्मिक ग्रंथ है जिसमें भारतीय अध्यात्म का निचोड़ समाया हुआ है यह अन्य ग्रंथों से एक बात में भिन्न है कि अन्य सभी के अध्यात्मिक उपदेश एवं संदेश किसी तीर्थ या एकांत शांत वातावरण में प्रस्फुटित हुए हैं लेकिन गीता का उद्गम स्थल युद्ध क्षेत्र है यही इसको विशिष्ट बनाता है जो जीवन के तनावपूर्ण क्षणों में योगेश्वर भगवान के श्री मुख से निश्चित होता हुआ शाश्वत संगीत है https://www.instagram.com
सामने खड़ा है मोह ग्रस्त आरती मोड़ अवसाद में डूबा अर्जुन जो युद्ध क्षेत्र- कर्म क्षेत्र से पलायन की मनोदशा में है और इसके पक्ष में तमाम तरह के तर्कों को तर्कों से युक्त है लेकिन श्रीकृष्ण उसके एक-एक प्रश्न कुतर्क आशंका को निर्मूल करते हुए अंततः अर्जुन को धर्म युद्ध के लिए तैयार करते हैं।
गीता की शुरुआत विषाद योग से होती है यह गीता की ही विशेषता है कि इसमें विशाल को योग की प्राथमिक शिरडी के रूप में प्रस्तुत किया गया हैदेखा जाए तो जीवन में योग की शुरुआत विषाद के गर्भ से ही होती है जब जीवन अपार दुख कष्ट संताप एवं निशांत से अंक रात हो जाता है और शक्ल संसारी के उपरांत समाप्त हो जाते हैं तो इन पलों में जीवन की क्षणभंगुर था और सांसारिक आश्रयो की निरर्थकता का बोध होता है ।
गीता वह आध्यात्मिक ग्रंथ है जिसमें भारतीय अध्यात्म का निचोड़ समाया हुआ है यह अन्य ग्रंथों से एक बात में भिन्न है कि अन्य सभी के अध्यात्मिक उपदेश एवं संदेश किसी तीर्थ या एकांत शांत वातावरण में प्रस्फुटित हुए हैं लेकिन गीता का उद्गम स्थल युद्ध क्षेत्र है यही इसको विशिष्ट बनाता है जो जीवन के तनावपूर्ण क्षणों में योगेश्वर भगवान के श्री मुख से निश्चित होता हुआ शाश्वत संगीत है https://www.instagram.com
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