योग - साधना
🌟योग-साधना🌟
योग- साधना का अर्थ स्वयं को एक असमर्थ सत्ता के हवाले कर देना है स्वास्थ्य योग का अर्थ आत्मा परमात्मा के मिलन से लगाते हैं और बिना समर्पण के कोई मिलन संभव नहीं हो सकता यूं कहने को योग की परिभाषाएं अनेकों हो सकती हैं परंतु उनके पीछे की भावना एक ही है कि हम स्वयं को परमात्मा के इशारों पर संकेतों पर चलने के लिए तैयार कर लें जब हम अपने जीवन की रीति नीति को भगवान के इच्छा के अनुसार व्यवस्थित कर लेते हैं तो हम भगवान के सच्चे भक्तों में सम्मिलित हो जाते हैं ।
योग- साधना में अपना सर्वशक्तिमान ईश्वर को समर्पित किया जाता है अपनी बुद्धि अपना श्रम अपना समय अपनी प्रतिभा अपना मनोयोग- यह सब हम भगवान के कार्यों को पूरा करने में लगा सकते हैं जब हम स्वयं को अर्पित करने को तैयार होते हैं तो भगवान भी हम पर अपना सब कुछ लुटा देने को तैयार होते हैं भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए पहले बीज की तरह से लगाने को तैयार होना पड़ता है भगवान के यहां अनुदान ओं की कमी नहीं है पर उनको प्राप्त करने से पहले स्वयं को अर्पित करने की साधना करनी पड़ती है।स्व के अर्पण की साधना ही योग साधना है।
कबीर दास जी ने लिखा है-
साईं मेरा बानिया सहज करै व्यापार ।
दिन तखरी बिन पालडे तौले सब संसार।।
अर्थात मेरा भगवान सहज व्यापार करता है वह तो सिर्फ समर्पण का मूल जानता है यदि भगवान के साथ संबंध स्थापित करना हो तो समर्पण को ही आधार बनाना होगा यही समर्पण योग साधना का भी मूल मंत्र है स्वयं को अपने सर्वस्व को परमात्मा को अर्पित कर देने वाले ही सच्चे योग साधक कहलाते हैं।
योग- साधना का अर्थ स्वयं को एक असमर्थ सत्ता के हवाले कर देना है स्वास्थ्य योग का अर्थ आत्मा परमात्मा के मिलन से लगाते हैं और बिना समर्पण के कोई मिलन संभव नहीं हो सकता यूं कहने को योग की परिभाषाएं अनेकों हो सकती हैं परंतु उनके पीछे की भावना एक ही है कि हम स्वयं को परमात्मा के इशारों पर संकेतों पर चलने के लिए तैयार कर लें जब हम अपने जीवन की रीति नीति को भगवान के इच्छा के अनुसार व्यवस्थित कर लेते हैं तो हम भगवान के सच्चे भक्तों में सम्मिलित हो जाते हैं ।
कबीर दास जी ने लिखा है-
साईं मेरा बानिया सहज करै व्यापार ।
दिन तखरी बिन पालडे तौले सब संसार।।
अर्थात मेरा भगवान सहज व्यापार करता है वह तो सिर्फ समर्पण का मूल जानता है यदि भगवान के साथ संबंध स्थापित करना हो तो समर्पण को ही आधार बनाना होगा यही समर्पण योग साधना का भी मूल मंत्र है स्वयं को अपने सर्वस्व को परमात्मा को अर्पित कर देने वाले ही सच्चे योग साधक कहलाते हैं।
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