सफेद शेर के इतिहास की कहानियां
सफेद से सबसे पहले एमपी के रीवा जिले में पाया गया था। सफेद शेरों का बांधवगढ़ और कान्हा नेशनल पार्क की वजह से मध्य प्रदेश वर्ड में जाना जाता है। जिस तरह का माना का शुभा होता है वही स्थिति में भी है बागों में अपने इंजी बोस शक्तियों की सहायता से समझने की बड़ी शक्ति होती है। 27 मई 1964 की ऐतिहासिक तारीख जिस दिन वस्तुआ मड़वास रेंज सीधी जिले के देवा गांव दरार में छिपे सफेद शावक बाघ को रीवा के अंतिम महाराजा मार्तंड सिंह ने पकड़ पाया उन्होंने उसका नाम मोहन रखा मोहन के आकर्षण से अभिभूत होकर महाराजा ने शिकार करना छोड़ दिया। आदिम युग में कभी शिकार खाने के लिए किए जाते थे बाघ का शिकार राजाओं की वीरता और शौर्य से जुड़ा शौक था जो मेहमानों को दिखाने के लिए होता था मचान पर चढ़कर किस वीरता का खेल कहेंगे उनके पूर्वजों में रघुराज सिंह ने 39 वेंकट रमण सिंह ने 558 गुलाब सिंह ने 619 और स्वयं उन्होंने पचासी बाघों के शिकार किए बिंद का यह अंचल बाघ वाली जो कालांतर से भगवान कहलाया। मोहन जीवन के अंतिम दिनों तक गोविंदगढ़ रीवा महाराज के किले बाघ वाले में रहा 1969 में उसकी मृ...